
सेंट्रल छत्तीसगढ़ / विनोद उपाध्याय (हरदीबाजार).. जिला कोरबा के पाली ब्लॉक अंतर्गत हरदीबाजार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा अपनी स्थापना के शताब्दी वर्ष के अंतर्गत 2 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक जिलेभर में विशेष उत्सव एवं जनजागरण अभियान का आयोजन किया गया है ।इसी क्रम में पाली खंड के हरदीबाजार मंडल में विजयादशमी उत्सव एवं पथ संचलन का कार्यक्रम आयोजित किया गया । पथ संचलन की शुरुआत पुरानी आर्यन पब्लिक स्कूल परिसर से किया गया। यह कॉलेज चौक, बस स्टैंड होते हुए नवीन आर्यन पब्लिक स्कूल प्रांगण में संपन्न हुआ। वहां मुख्य वक्ता कैलाश नाहक जी द्वारा स्वयंसेवकों को संबोधित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विजय जायसवाल जी रहे। साथ ही खंड कार्यवाह बुद्धि सागर शाही जी भी उपस्थित रहे।जबकि कार्यक्रम की रूपरेखा एवं अतिथियों का परिचय सनातन संघर्ष समिति के जिला संयोजक अजय कुमार दुबे ने कराया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता कैलाश नाहक ने बताया कि संघ का शताब्दी वर्ष पांच प्राथमिक कार्य क्षेत्रों पर केंद्रित है
पहला कुटुंब‑प्रबोधन: पारिवारिक एकता, संस्कारों और संवाद को प्रोत्साहित करना,दूसरा पर्यावरण संतुलन: वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्लास्टिक-मुक्ति हेतु जनचेतना,तीसरा सामाजिक समरसता: जाति-भेद मिटाकर भाईचारे की भावना को बल देना,चौथा नागरिक कर्तव्य: सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा और नियमों के पालन की प्रेरणा,पांचवा स्वदेशी चेतना व भाषा‑गौरव: मातृभाषा, संस्कृति और स्वदेशी उत्पादों का समर्थन। कैलाश जी ने बताया कि इस अभियान के अंतर्गत गांव-गांव शिखर सभाएं, भजन-परिवार दिवस, पर्यावरण शिविर, सामाजिक कार्यशालाएं और नागरिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रत्येक गांव के 10–15 परिवारों तक स्वयंसेवकों की सीधी पहुँच बनाई जाएगी। गणवेश अभियान के माध्यम से सक्रिय नागरिकों को जोड़ा जा रहा है। संघ द्वारा घर‑घर संपर्क अभियान के तहत प्रत्येक घर तक एक भारत माता का चित्र, सूचना फोल्डर और अभियान की जानकारी पहुंचाई जा रही है। यह कार्य वर्ष भर चलता रहेगा, जिससे दीर्घकालिक सामाजिक सहभागिता सुनिश्चित हो सके।
कैलाश नाहक जी ने अपने संबोधन में भगवान राम, श्रीकृष्ण, शिवाजी, स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों के उदाहरणों से बताया कि समाज जागरण में व्यक्तिगत नैतिकता और संगठित प्रयास दोनों ही आवश्यक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले सौ वर्षों में संघ ने समाज सेवा, शिक्षा,आपदा राहत,व स्वावलंबन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं, और यह शताब्दी वर्ष केवल कार्यक्रमों की शृंखला नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक नई नींव का आरंभ है। कार्यक्रम में नागरिकों से अपील की गई कि वे इस अभियान से जुड़ें, अपने परिवार में सप्ताह में एक दिन भजन‑संस्कार और सामूहिक भोजन का आयोजन करें तथा संघ के पांच प्रमुख संकल्पों को अपनाएं ।।