
कटघोरा (सेन्ट्रल छत्तीसगढ़):नगर के मुख्य मार्गों पर जिला प्रशासन द्वारा भारी वाहनों के लिए 24 घंटे की नो-एंट्री लागू की गई है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। कटघोरा शहर के बीचों-बीच दिन-रात भारी वाहनों का तांता लगा रहता है, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
हादसे को न्यौता देता भारी ट्रैफिक
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुलिस और नगर पालिका प्रशासन की नाक के नीचे से 24 घंटे भारी वाहन (ट्रेलर, ट्रक, और हाइवा) बेखौफ गुजर रहे हैं। आलम यह है कि स्कूली बच्चों और पैदल राहगीरों के लिए सड़क पार करना भी दूभर हो गया है। हाल के दिनों में बिलासपुर-कटघोरा और अंबिकापुर-कटघोरा मार्ग पर हुए हादसों के बाद भी प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
नियमों के मुताबिक, भारी वाहनों को शहर के बाहर बने बाईपास से गुजरना चाहिए, लेकिन डीजल बचाने और समय कम करने के चक्कर में वाहन चालक प्रतिबंधित समय में भी मुख्य मार्ग का उपयोग कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि शहर के प्रवेश द्वारों पर तैनात पुलिस बल इन वाहनों को रोकने के बजाय मूकदर्शक बना रहता है।
मुख्य समस्याएं:
- प्रदूषण और शोर: रिहायशी इलाकों में दिन-रात भारी मशीनों की गूंज और धूल से बुजुर्गों और मरीजों का बुरा हाल है।
- सड़कों की बर्बादी: क्षमता से अधिक भार लेकर चल रहे ये वाहन शहर की आंतरिक सड़कों को गड्डों में तब्दील कर रहे हैं।
- पार्किंग का अभाव: मुख्य मार्ग पर खड़े होने वाले ट्रक जाम की मुख्य वजह बन रहे हैं।
नगरवासियों की मांग:
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि नो-एंट्री का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वाले भारी वाहनों पर भारी जुर्माना लगाया जाए, इससे पहले कि कोई मासूम इस लापरवाही की भेंट चढ़ जाए।