
कोरबा ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ ) पोड़ी-उपरोड़ा : छत्तीसगढ़ शासन द्वारा साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए आयोजित ‘उल्लास नव साक्षरता’ कार्यक्रम के दावों की हवा पोड़ी-उपरोड़ा ब्लॉक के ग्राम भुलेझरिया में निकल गई। रविवार को आयोजित होने वाली इस मूल्यांकन परीक्षा के लिए जहाँ पूरे जिले में तैयारी के निर्देश थे, वहीं भुलेझरिया प्राथमिक शाला में शिक्षक ही नहीं पहुंचे।
शिक्षक नदारद, बच्चों ने संभाला स्कूल का मोर्चा.. सुनिए मुंह जवानी.. वीडियो
प्राथमिक शाला भुलेझरिया को ‘उल्लास’ मूल्यांकन परीक्षा के लिए केंद्र बनाया गया था। परीक्षा देने के लिए ग्रामीण पहुंचे थे, लेकिन वहां कोई शिक्षक मौजूद नहीं था। चौंकाने वाली बात यह रही कि शिक्षकों ने बच्चों को फोन पर निर्देश देकर स्कूल का ताला खुलवाया था। जब मीडिया की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची, तो बच्चों ने स्पष्ट किया कि “शिक्षक नहीं आएंगे और आज कोई परीक्षा नहीं हो रही है।”
प्रमुख बिंदु: लापरवाही की पराकाष्ठा
- बच्चों ने खोला स्कूल: मीडिया की टीम जब मौके पर पहुंची, तो पाया कि स्कूल का ताला शिक्षकों ने नहीं, बल्कि बच्चों ने खोला था।
- नदारद शिक्षक: स्कूल में पदस्थ शिक्षक तीजराम पटेल और राजेंद्र सिंह कंवर अनुपस्थित पाए गए। बच्चों ने बताया कि उन्हें सिर्फ स्कूल खोलने का निर्देश दिया गया था, परीक्षा लेने वाला वहां कोई मौजूद नहीं था।
- ग्रामीणों का आक्रोश: गांव के सरपंच और ग्रामीणों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है। बीहड़ और दूरस्थ क्षेत्र होने का फायदा उठाकर शिक्षक अक्सर गायब रहते हैं।
- नियमों की धज्जियां उड़ा रहे संकुल प्रभारी
- ग्रामीणों और स्थानीय सरपंच ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि यहाँ पदस्थ शिक्षक तीजराम पटेल (जो संकुल प्रभारी भी हैं) और राजेंद्र सिंह कंवर अपनी मनमानी पर उतारू हैं।
- नियम क्या है: शासन के नियमानुसार संकुल प्रभारियों को कम से कम दो विषयों का अध्यापन कार्य करना अनिवार्य है।
- हकीकत क्या है: ग्रामीणों के अनुसार, तीजराम पटेल केवल संकुल व्यवस्था के नाम पर ‘तुमान’ में ही जमे रहते हैं और कभी स्कूल नहीं आते। स्कूल पूरी तरह से भगवान भरोसे या कभी-कभार आने वाले एक शिक्षक के सहारे चल रहा है।
सड़क बनी, पर सोच नहीं बदली
हैरानी की बात यह है कि भुलेझरिया प्राथमिक शाला मुख्य मार्ग से लगभग 10 किमी दूर है और अब वहां पहुंच मार्ग (सड़क) की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके बावजूद शिक्षकों द्वारा क्षेत्र के ‘दुर्गम’ होने का बहाना बनाकर अपनी मनमानी जारी रखी जा रही है।
अधिकारियों का रुख
मीडिया द्वारा मामले की जानकारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) को दी गई है।
- BEO ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
- अधिकारियों ने संकुल प्रभारियों से जवाब-तलब करने और दोषी शिक्षकों पर कार्रवाई करने की बात कही है।
ग्रामीणों का सवाल: “जब शिक्षक ही समय पर स्कूल नहीं पहुंचेंगे और सरकारी योजनाओं की परीक्षा के दिन अनुपस्थित रहेंगे, तो क्षेत्र के बच्चे और वयस्क कैसे साक्षर बनेंगे?”