
जमनीपाली/कोरबा ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ ): कभी जमनीपाली की पहचान और मनोरंजन का केंद्र रहा ऐतिहासिक मोहन टाकीज (सिनेमा हॉल) आज क्षेत्र के लिए सिरदर्द बन गया है। देख-रेख के अभाव में जर्जर हो चुकी यह इमारत अब असामाजिक तत्वों और नशा करने वालों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन चुकी है। आलम यह है कि शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
खंडहर में अवैध गतिविधियों का बोलबाला
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पिछले कई वर्षों से बंद पड़े इस टॉकीज में दिन-रात शराबियों और गांजा पीने वालों का जमावड़ा लगा रहता है। नशे की हालत में ये असामाजिक तत्व अक्सर मोहल्ले की शांति भंग करते हैं, जिससे बस्ती की महिलाओं और बच्चों का घर से निकलना दूभर हो गया है। पुरानी बस्ती के निवासियों ने बताया कि टॉकीज की इमारत इतनी जर्जर हो चुकी है कि यहाँ कभी भी कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है।

प्रशासनिक उदासीनता: 3 महीने बाद भी गेट सील नहीं
हैरानी की बात यह है कि ग्राम विकास समिति और स्थानीय निवासियों ने करीब तीन महीने पहले वार्ड पार्षद, टॉकीज मालिक और संबंधित थाना प्रभारी को लिखित आवेदन देकर मुख्य गेट को सील करने की गुहार लगाई थी। इसके बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस ढिलाई का फायदा उठाते हुए असामाजिक तत्वों ने अब टॉकीज का मुख्य गेट ही तोड़ दिया है, जिससे अंदर अवैध गतिविधियों का संचालन और आसान हो गया है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर खड़े हुए गंभीर सवाल
ग्रामीणों ने सीधे तौर पर पुलिस प्रशासन की नाकामी को उजागर करते हुए कहा कि संबंधित थाना क्षेत्र के कर्मियों को इस नशे के कारोबार की भली-भांति जानकारी है। इसके बावजूद संलिप्त व्यक्तियों पर कार्रवाई न होना मिलीभगत की ओर इशारा करता है। वार्ड 54 के पार्षद और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी ने भी लोगों के गुस्से को और हवा दे दी है।
उग्र आंदोलन की दी चेतावनी
नाराज ग्रामीणों और ‘छत्तीसगढ़िया पार्टी’ के माध्यम से प्रेषित ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि यदि तत्काल मोहन टाकीज के गेट को सील नहीं किया गया और नशे के अवैध कारोबार पर अंकुश नहीं लगा, तो क्षेत्रवासी उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि भविष्य में होने वाली किसी भी अनहोनी या कानून-व्यवस्था बिगड़ने की पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की होगी।
“हमारे ग्राम जमनीपाली बस्ती में अवैध शराब और गांजा बिक्री का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। प्रशासन को बार-बार अवगत कराने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। अब हमारी बर्दाश्त की सीमा समाप्त हो चुकी है।”
— समस्त निवासी, पुरानी बस्ती जमनीपाली