
कटघोरा ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ ) : कटघोरा के समीपस्थ ग्राम डुडगा में डिक्सेना परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् देवी भागवत कथा के दौरान भक्ति की अविरल धारा बह रही है। 19 मार्च से शुरू हुई इस कथा में सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित श्री नारायण महाराज ने जीवन के गूढ़ रहस्यों को भक्तों के समक्ष साझा किया।

सुख और दुःख: कर्मों का प्रतिफल
व्यास पीठ से कथा का रसपान कराते हुए महाराज श्री ने कहा कि सुख और दुःख जीवन के दो ऐसे पहलू हैं जैसे धूप और छाँव। ये हमारे कर्मों के अनुसार आते-जाते रहते हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा:

”सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, बल्कि मन की शांति और संतोष में निहित है। दुःख हमें मजबूत बनाने वाला एक शिक्षक है, जबकि सुख ईश्वर का वह उपहार है जो हमें कृतज्ञ होना सिखाता है।”
ग्राम डुडगा में श्रीमद् देवी भागवत कथा का भव्य आयोजन; डिक्सेना परिवार द्वारा आयोजित कथा में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़
आद्याशक्ति की महिमा का बखान
पंडित नारायण महाराज ने श्रीमद् देवी भागवत महापुराण की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अठारह पुराणों में इसका स्थान सर्वोच्च है। शक्ति के उपासक इसे ‘शाक्त भागवत’ कहते हैं।
- सृष्टि का आधार: यह महाशक्ति ही परम ब्रह्म है। इन्हीं की शक्ति से ब्रह्मा जी सृष्टि की रचना करते हैं, विष्णु जी पालन करते हैं और शिव जी संहार करते हैं।
- दिव्य रूप: देवी की इसी अनंत शक्ति को हम नौ दुर्गाओं और दस महाविद्याओं के रूप में पूजते हैं।
- कथा का फल: महाराज जी ने बताया कि इस कथा के श्रवण से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति सुलभ हो जाती है।
भक्तिमय वातावरण और आकर्षण
कथा के दौरान प्रस्तुत की जा रही आकर्षक झांकियों और संगीतमय भजनों ने समूचे वातावरण को भक्तिमय कर दिया है। श्रद्धालु भजनों की धुन पर झूमते नजर आ रहे हैं।
आयोजन विवरण
- स्थान: ग्राम डुडगा (कटघोरा के पास)
- आयोजक: डिक्सेना परिवार
- कथा प्रारंभ: 19 मार्च
- कथा समापन: 26 अप्रैल