आजादी के दशकों बाद भी ‘पथरीली’ राहों पर ग्रामीण: आमाखोखरा में 9 गांवों की लाइफलाइन जर्जर, प्रशासन मौन..

कटघोरा (सेन्ट्रल छत्तीसगढ़) आशुतोष शर्मा: आधुनिकता के इस दौर में जहाँ सरकारें सड़कों का जाल बिछाने का दावा कर रही हैं, वहीं कटघोरा से लगा ग्राम आमाखोखरा आज भी मध्यकालीन युग की समस्याओं से जूझ रहा है। यहाँ लगभग सौ साल बीत जाने के बाद भी एक अदद पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो सका है। ग्रामीण आज भी उसी पुरानी डब्लूबीएम (WBM) सड़क पर चलने को मजबूर हैं, जो अब पूरी तरह जर्जर हो चुकी है।

9 गांवों का मुख्य संपर्क मार्ग, फिर भी अनदेखी

​यह सड़क केवल आमाखोखरा ही नहीं, बल्कि आसपास के लगभग 9 गांवों के ग्रामीणों के लिए मुख्य मार्ग है। रोजाना हजारों लोग इसी उबड़-खाबड़ और पथरीली सड़क से होकर कटघोरा शहर और अपने गंतव्य तक पहुँचते हैं। कई साल पहले बना हुआ डब्लूबीएम ढांचा अब पूरी तरह उखड़ चुका है, जिससे आए दिन राहगीर चोटिल हो रहे हैं।

प्रशासनिक फाइलों में दफन है ग्रामीणों की उम्मीद

​ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने सड़क निर्माण की मांग को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के चक्कर कई बार लगाए हैं। दर्जनों बार आवेदन और ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला।

  • शिकायत: ग्रामीणों ने बताया कि बारिश के दिनों में यह सड़क कीचड़ के दलदल में तब्दील हो जाती है, जिससे एम्बुलेंस या अन्य आपातकालीन वाहनों का आना असंभव हो जाता है।
  • दहशत: जर्जर सड़क के कारण रात के समय सफर करना किसी खतरे से खाली नहीं होता।

खिलाड़ियों और बच्चों को भी भारी परेशानी

​गांव के युवाओं और स्कूली बच्चों को इसी जर्जर मार्ग से गुजरना पड़ता है। हाल ही में क्षेत्र के खिलाड़ियों ने भी इस बदहाली को लेकर नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे आने वाले समय में उग्र आंदोलन को विवश होंगे।

प्रमुख बिंदु (News Highlights):

  • 100 साल का इंतजार: पीढ़ियां गुजर गईं, लेकिन सड़क नहीं बदली।
  • 9 गांवों का संकट: एक सड़क की बदहाली से हजारों की आबादी प्रभावित।
  • प्रशासनिक उदासीनता: बार-बार गुहार के बावजूद धरातल पर काम शून्य।