
कोरबा ( सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ ) : गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के संस्थापक और आदिवासियों के महान नेता दादा हीरा सिंह मरकाम जी को उनकी 5वीं पुण्यतिथि पर आज सिमगा में बड़े ही श्रद्धाभाव और उत्साह के साथ याद किया गया। हीरा-मोती चौक, सिमगा में आयोजित इस कार्यक्रम में उनके विचारों और सिद्धांतों को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।

जननायक का स्मरण: ‘हीरा’ के बिना ‘मोती’ अधूरा
दादा हीरा सिंह मरकाम जी (जिन्हें उनके साथी आचार्य मोतीरावण कंगाली के साथ प्यार से ‘हीरा-मोती’ कहा जाता था) का निधन 28 अक्टूबर 2020 को हुआ था। वे केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि गोंडी संस्कृति, भाषा और जल, जंगल, ज़मीन के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले एक जननायक थे।उनका सपना था कि समाज के गरीब, पिछड़े और आदिवासी लोगों को उनका हक और सम्मान मिले। सिमगा में आयोजित यह 5वीं पुण्यतिथि का कार्यक्रम उनके इसी सपने को आगे बढ़ाने का संकल्प दिखाता है।
सिमगा में एकजुटता का प्रदर्शन
‘हीरा मोती सेना’ के तत्वाधान में आयोजित इस कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं का उत्साह देखने लायक था। दूर-दराज से आए कार्यकर्ताओं ने भारी संख्या में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर यह साबित कर दिया कि दादा मरकाम जी के विचार आज भी लाखों लोगों के दिलों में जीवित हैं।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से हीरा मोती सेना संयोजक योगेन्द्र राजन, अध्यक्ष दिनेश्वर मरकाम, रणजीत आर्मो, दिलेश आयाम, राकेश आर्मों, लक्ष्मण पुलस्त, नाहक, विनोद, देवेंद्र, पन्नेश्वर, रामकुमार, ओमप्रकाश, आकाश धनुहार, मनिंद्र, धरम पाल, मोहन, दिल सिंह, महावीर आर्मो, बिट्टू सरुता, रवि, देव प्रताप और अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी ने दादा जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए और उनके संघर्षों को याद किया।
संदेश: संघर्ष और स्वाभिमान की मशाल
हीरा मोती सेना के संयोजक योगेन्द्र राजन ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि, “दादा मरकाम जी ने हमें स्वाभिमान और आत्मसम्मान से जीना सिखाया। आज उनकी पुण्यतिथि पर हम सब यह संकल्प लेते हैं कि उनके दिखाए रास्ते पर चलते हुए, समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और अधिकार पहुँचाने का कार्य जारी रखेंगे।”
अध्यक्ष दिनेश्वर मरकाम ने जोर दिया कि, “दादा जी के सिद्धांत – ‘जल, जंगल, ज़मीन’ पर सभी का समान अधिकार है। हमें उनकी विचारधारा को घर-घर तक पहुँचाना है ताकि गोंडवाना आंदोलन की मशाल हमेशा जलती रहे।”
यह आयोजन सिर्फ एक श्रद्धांजलि सभा नहीं था, बल्कि यह एक शक्ति प्रदर्शन था जो यह बताता है कि एक महान नेता के विचार कभी मरते नहीं। यह दिखाता है कि एक व्यक्ति का संघर्ष कैसे एक पूरी सेना को प्रेरित कर सकता है। दादा हीरा सिंह मरकाम जी का नाम हमेशा गोंडवाना आंदोलन के इतिहास में सम्मान के साथ लिया जाता रहेगा। सिमगा की यह एकजुटता उनके अनुयायियों के अटल संकल्प को दर्शाती है।