
कटघोरा (सेन्ट्रल छत्तीसगढ़): कटघोरा क्षेत्र में रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब वे दिन के उजाले का इंतज़ार भी नहीं करते। प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर रात के सन्नाटे में बरतरई, औराभाटा और मल्दा घाट की नदियों का सीना चीरा जा रहा है। माइनिंग विभाग की कथित सख्ती केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है, जबकि जमीनी हकीकत में रात होते ही रेत का अवैध कारोबार चरम पर पहुंच जाता है।
रेलवे साइडिंग के रास्ते तस्करी का खेल
तूमान क्षेत्र के आरन नदी (बरबसपुर) में माफियाओं ने तस्करी का नया रास्ता खोज लिया है। रात के अंधेरे में रेलवे साइडिंग के रास्ते सैकड़ों ट्रैक्टर अवैध रेत लेकर गुजर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन में माइनिंग अधिकारियों के डर का दिखावा करने वाले माफिया रात होते ही बेखौफ हो जाते हैं।
प्रमुख प्रभावित क्षेत्र और माफियाओं का नेटवर्क:
- नदी घाट: बरतरई, औराभाटा, मल्दा और आरन नदी।
- भंडारण केंद्र: एकलव्य विद्यालय रामपुर के समीप।
- परिवहन मार्ग: बरबसपुर रेलवे साइडिंग और मुख्य ग्रामीण मार्ग।
अधिकारियों की चुप्पी पर उठते सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि माइनिंग विभाग को इसकी पूरी जानकारी है, लेकिन ‘रात के खेल’ पर अंकुश लगाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। माफियाओं का यह आतंक न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि शासन को लाखों रुपये के राजस्व की चपत भी लगा रहा है।
ग्रामीणों की मांग: “रात के समय इन संवेदनशील घाटों पर गश्त बढ़ाई जाए और अवैध भंडारण करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।”