अधिवक्ता बालक राम बरेठ की दमदार पैरवी से लोक अदालत में टूटा न्याय का इंतज़ार, जज सुनील कुमार नन्दे की पीठ ने सड़क हादसे में मृतक के परिजनों को दिलाया 6 लाख रुपये का मुआवजा

कोरबा।
नेशनल लोक अदालत में एक बार फिर यह साबित हुआ कि जब कानूनी लड़ाई सही दिशा और मजबूत पैरवी के साथ लड़ी जाए तो पीड़ित परिवार को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ता। अधिवक्ता बालक राम बरेठ की प्रभावशाली व तथ्यपरक पैरवी के चलते सड़क दुर्घटना में मृतक अयोध्या सिंह के परिजनों को नेशनल लोक अदालत के माध्यम से 6,00,000 रुपये (छः लाख रुपये) का मुआवजा मिला। तृतीय मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, कोरबा में पीठासीन माननीय न्यायाधीश सुनील कुमार नन्दे की अध्यक्षता में गठित लोक अदालत खंडपीठ ने आपसी समझौते के आधार पर इस प्रकरण का निराकरण किया।

यह मामला मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण क्रमांक 15/2025 से संबंधित है, जिसका निराकरण 13 दिसंबर 2025 को किया गया। प्रकरण में मृतक की पत्नी श्रीमती बिरसो बाई सहित कुल छह आवेदक शामिल थे।

दर्दनाक हादसे की पृष्ठभूमि

प्रकरण के अनुसार, 11 सितंबर 2024 को अयोध्या सिंह मोटरसाइकिल से गढ़ उपरोड़ा से लौट रहे थे। रात्रि लगभग 8:30 बजे रपटा पुल, कनसरा के पास तेज एवं लापरवाहीपूर्वक चलाए जा रहे एक अन्य मोटरसाइकिल चालक ने उन्हें टक्कर मार दी। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि अयोध्या सिंह की मौके पर ही मृत्यु हो गई।

घटना के बाद परिजनों ने न्याय की गुहार लगाते हुए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में क्षतिपूर्ति का दावा प्रस्तुत किया था।

लोक अदालत में सहमति, बीमा कंपनी ने मानी जिम्मेदारी

नेशनल लोक अदालत के दौरान दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ, जिसके तहत यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने कुल 6 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि अदा करने पर सहमति दी। यह राशि ब्याज एवं वाद व्यय सहित तय की गई है। अदालत ने बीमा कंपनी को 30 दिवस के भीतर राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं, अन्यथा अदायगी दिनांक तक 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देय होगा।

मुआवजे का वितरण

अदालती आदेश के अनुसार —

  • मृतक की पत्नी श्रीमती बिरसो बाई को 3,00,000 रुपये (तीन लाख रुपये)
  • अन्य पांच आवेदकों को 60,000 रुपये (साठ हजार रुपये) प्रति व्यक्ति

राशि एकाउंट पेयी चेक के माध्यम से प्रदान की जाएगी।

अधिवक्ता बालक राम बरेठ की निर्णायक भूमिका

पूरे प्रकरण में आवेदक पक्ष की ओर से अधिवक्ता बालक राम बरेठ ने कानूनी तथ्यों के साथ-साथ मानवीय पहलुओं को मजबूती से अदालत के समक्ष रखा। उनकी संतुलित, रणनीतिक और प्रभावी पैरवी के कारण मामला लंबी न्यायिक प्रक्रिया में उलझने के बजाय लोक अदालत में त्वरित न्याय के साथ सुलझ सका।

कानूनी जानकारों का मानना है कि अधिवक्ता बालक राम बरेठ की यह पैरवी लोक अदालत की मूल भावना — सहमति, समाधान और शीघ्र न्याय — का सशक्त उदाहरण है।

लोक अदालत की भूमिका फिर साबित

यह फैसला न केवल मृतक परिवार के लिए बड़ी राहत लेकर आया, बल्कि यह भी दर्शाता है कि नेशनल लोक अदालत आम नागरिकों के लिए न्याय तक पहुंच का एक प्रभावी और भरोसेमंद मंच बन चुकी है।