अंकित सिंह : विशेष संवाददाता
कोरबा। कुसमुंडा स्थित डीएवी स्कूल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही अब सामने आई है। यहां नर्सरी कक्षा के मासूम बच्चों की पढ़ाई पिछले तीन महीने से ठप है। आश्चर्यजनक यह है कि अभिभावकों से पूरे साल की फीस पहले ही जमा कर ली गई है, लेकिन बच्चों को पढ़ाई कराने की बुनियादी जिम्मेदारी निभाने में प्रबंधन पूरी तरह नाकाम रहा है।
फीस जमा, क्लास बंद – अभिभावक परेशान
अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए हर साल की तरह समय पर एडवांस फीस जमा कर चुके हैं। लेकिन इस बार फीस वसूली के बावजूद बच्चों की कक्षाएं शुरू नहीं की गईं। तीन महीने से बच्चे घर पर बैठे हैं, जिससे उनका शैक्षिक आधार कमजोर हो रहा है। एक अभिभावक ने कहा – “हमने भरोसा करके एडवांस में पूरा शुल्क दे दिया, लेकिन स्कूल ने बच्चों को पढ़ाने की जगह केवल बहाने बनाए हैं। आखिर छोटे बच्चों के साथ इतना बड़ा खिलवाड़ क्यों ?”
प्रबंधन की सफाई – बिल्डिंग तैयार नहीं
इधर, इस पूरे मामले पर स्कूल प्रिंसिपल चंद्र मोहन पाण्डेय ने सफाई देते हुए कहा कि एसईसीएल की ओर से नई बिल्डिंग का निर्माण कराया जा रहा है, जिसे हैंडओवर करने में देरी हो रही है। इसी कारण बच्चों को स्कूल नहीं बुलाया जा रहा। पाण्डेय का कहना है कि “कोशिश है कि 15 सितंबर से नर्सरी की कक्षाएं शुरू कर दी जाएं और समय रहते पूरा सिलेबस बच्चों को पढ़ा दिया जाए।”
दबाव में आएंगे मासूम
हालांकि शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तर्क किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है। उनके अनुसार तीन महीने की पढ़ाई बंद रहने से बच्चों के मानसिक और शैक्षिक विकास पर असर पड़ा है। अब यदि कम समय में पूरा सिलेबस पूरा करने की कोशिश की जाएगी तो मासूम बच्चों पर अनावश्यक दबाव बढ़ेगा। इस उम्र में शिक्षा को सहज और आनंदमय बनाने की जरूरत होती है, न कि इसे बोझ बना देने की।
केवल फीस वसूली पर फोकस ?
अभिभावकों ने सवाल उठाया है कि जब प्रबंधन को पहले से बिल्डिंग तैयार न होने की जानकारी थी तो पूरे साल की एडवांस फीस क्यों जमा कराई गई ? उनका आरोप है कि स्कूल प्रशासन बच्चों की पढ़ाई की चिंता करने के बजाय केवल फीस वसूली पर फोकस कर रहा है। “अगर क्लास ही नहीं चल रही थी तो हमें एडवांस फीस लौटाई जानी चाहिए थी। यह सीधे-सीधे धोखाधड़ी है,” अभिभावकों ने कहा।
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
इस पूरे मामले ने शिक्षा व्यवस्था और स्कूल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि इस लापरवाही पर संज्ञान लिया जाए। साथ ही फीस वसूली और पढ़ाई बंद करने की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
बच्चों का भविष्य दांव पर
स्पष्ट है कि तीन महीने से नर्सरी के बच्चों की पढ़ाई रुकने से उनका कीमती समय बर्बाद हुआ है। शुरुआती शिक्षा बच्चे के जीवन की बुनियाद होती है और इस बुनियाद के साथ लापरवाही कर डीएवी प्रबंधन ने गंभीर गलती की है। सवाल यह है कि क्या प्रबंधन अब भी केवल फीस वसूली पर ध्यान देगा या मासूम बच्चों के भविष्य की चिंता करते हुए तत्काल ठोस कदम उठाएगा ?