
सेंट्रल छत्तीसगढ़ / विनोद उपाध्याय.कोरबा.न्यायालय में विवादों को सुलझाने की एक निर्धारित प्रक्रिया है जिसमें एक बार प्रक्रिया शुरू हो जाने के पश्चात पक्षकार का नियंत्रण समाप्त हो जाता है और न्यायालय का नियंत्रण स्थापित हो जाता है, न्यायालय द्वारा एक पक्ष के हित में निर्णय सुनिश्चित है किंतु दूसरे पक्ष के विपरीत होना भी उतना ही सुनिश्चित है, दोनों पक्षों के हित में निर्णय हो जिससे दोनों पक्ष संतुष्ट हो सके ऐसा निर्णय न्यायालय नहीं दे सकता है, इसी तथ्य को ध्यान रखकर न्यायालय में होने वाले भार को कम करने के उद्देश्य से मध्यस्थता राष्ट्र के लिए एक अभियान राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली की ओर से चलाया जा रहा है जिसके तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा के जिला न्यायाधीश अध्यक्ष एवं सचिव महोदया जी के मार्गदर्शन में 30 जुलाई बुधवार को हाईस्कूल आमगांव में विशेष विधिक साक्षरता शिविर किया गया जिसमें राष्ट्र के मध्यस्थता अभियान 1 जुलाई से 7 अक्टूबर 2025 तक चलने वाले अभियान के बारे में विस्तार से बताया गया जैसे वैवाहिक विवाद संबंधी प्रकरण,दुर्घटना दावा मामले,घरेलू हिंसा,चेक बाउंस, वाणिज्यिक विवाद, सर्विस मेटर,अपराधिक समझौता योग्य मामले, उपभोक्ता विवाद मामले, ऋण वसूली मामले, विभाजन मामले, बेदखली मामले व भूमि अधिग्रहण मामले, अन्य उपयुक्त सिविल की तस्वीर मामले एवं नालसा द्वारा चलाए जा रहे स्कीम आशा योजना 2025 जागृति योजना 2025 संवाद योजना 2025 डान योजना 2025 साथ में निःशुल्क कानूनी सहायता, लोक अदालत, पाक्सो एक्ट पीड़ित क्षतिपूर्ति, बाल विवाह, मोटर अधिनियम, टोल फ्री नम्बर 15100,1098,स्पानशर स्कालरशिप योजना के बारे में भी अधिकार मित्र घनश्याम श्रीवास और रामशरण राठौर द्वारा जानकारी दिया गया है, इस साक्षरता शिविर के दौरान शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय आमगांव परिवार की ओर से प्राचार्य आर एल डहरिया और शिक्षक शिक्षिकाएं तथा छात्र छात्राएं उपस्थित रहे हैं। पीएलबी घनश्याम श्रीवास ने कोरबा जिला के निवासियों से अपील किया है कि वह अधिक से अधिक इस मध्यस्थता राष्ट्र के लिए योजना का लाभ उठाकर अपने प्रकरण सरल तरीके से निपटारा कर सकते हैं।।
