शिवनगरी पाली में दशहरा उत्सव को लेकर मायूसी: सांस्कृतिक कार्यक्रम न होने से समिति व जनप्रतिनिधियों के प्रति लोगों में भारी आक्रोश, रावण दहन में नहीं जुटी भीड़

कोरबा/ सेन्ट्रल छत्तीसगढ़ / पाली:शिवनगरी पाली में इस वर्ष दशहरा पर्व का रंग पूरी तरह फीका नजर आया। उत्सव समिति द्वारा पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन न किए जाने के कारण पाली शहर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में गहरा आक्रोश और नाराजगी देखी गई। स्थिति यह रही कि जिस ऐतिहासिक रावण दहन को देखने के लिए हर वर्ष जनसैलाब उमड़ता था, इस बार वहां नाममात्र की भीड़ ही पहुंची और मैदान खाली नजर आया।

परंपरा टूटने से ग्रामीणों और शहरवासियों में निराशा पाली की ऐतिहासिक पहचान रही है कि विजयादशमी के अवसर पर यहां भव्य सांस्कृतिक संध्या, झांकियां और विविध मंच कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं। इन आयोजनों का आनंद लेने के लिए न केवल शहर के बाशिंदे, बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में ग्रामीण पहुंचते थे। इस बार उत्सव समिति और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कथित उदासीनता के चलते सांस्कृतिक कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया, जिससे त्योहार की चमक पूरी तरह गायब रही।

जनप्रतिनिधियों और उत्सव समिति पर फूटा गुस्सा सांस्कृतिक मंच सूना रहने के विरोध में स्थानीय नागरिकों और दूर-दराज से पहुंचे ग्रामीणों ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। लोगों का कहना है कि शिवनगरी पाली की गौरवशाली परंपरा को दरकिनार किया गया है। त्योहारों के जरिए स्थानीय संस्कृति और भाईचारे को बढ़ावा मिलता था, लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही ने जनभावनाओं को आहत किया है।

मैदान में पसरा रहा सन्नाटा जनता के इस विरोध और मायूसी का सीधा असर रावण दहन स्थल पर दिखाई दिया। अमूमन जहां पैर रखने की जगह नहीं होती थी, वहां इस वर्ष मैदान लगभग खाली पड़ा रहा। पब्लिक के न पहुंचने से रावण दहन महज एक औपचारिकता बनकर रह गया। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और युवाओं ने मांग की है कि आगामी वर्षों में ऐसी लापरवाही न दोहराई जाए और पाली की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के लिए समिति व प्रशासन समय रहते ठोस कदम उठाए।