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कांकेर(सेंट्रल छत्तीसगढ़) : भानुप्रतापपुर विकासखण्ड के ग्राम बांसला में 12 चक्रवर्ती परिवार को 3 माह से समाज से निकाला कर दिया गया है. जिससे इनको न तो किसी के घर रोजी मजदूरी करने दिया जा रहा है और ना ही उनके घर किसी को आने दिया जा रहा है. इनके ऊपर रोजी-रोटी का संकट भी छाया हुआ है.
12 परिवार का सामाजिक बहिष्कार
पीड़ित पक्ष के संतुराम चक्रधारी ने बताया ‘गढ़बांसला में पुराने समय से हमारे पूर्वज दंतेश्वरी मंदिर में पुजारी के रूप में काम करते आ रहे हैं. उनके निधन के बाद इसका दायित्व मुझे मिला था, इसके बाद गांववालों ने यह आरोप लगाया कि मंदिर में आपके पूर्वजों ने दूसरे देवी-देवता को स्थापित कर दिया है. इसके लिए अलग-अलग गांव से देवी-देवता बुलाकर यह आरोप लगाया गया, इसको लेकर दंड स्वरूप बलि के रूप में 100 मुर्गे, बकरा, सुअर, भेड़ की बलि जैसे मांग की गई. मंदिर के शुद्धिकरण का भी खर्चा करने कहा गया. इस पर ग्रामीणों से कहा कि गरीब हूं इतनी सारी रकम और सामग्री व्यवस्था नहीं कर पाऊंगा.’
इस पर मेरे 12 परिवारों के लगभग 100 लोगों को गांव से अलग कर दिया गया है. मेरे परिवार को कहीं काम करने नहीं दिया जा रहा है. हम पूरे गरीब परिवारों को रोजी मजदूरी की भी समस्या खड़ी हो गई है. इस बात को सुलझाने के लिए अगर बैठक करते हैं तो सबसे पहले हमें 50 हजार रुपये जमा करना होगा, तब इस पर चर्चा होगी.यह भी लिखवाया गया है.
समाज के इस फैसले से पूरा 12 परिवार बेहद परेशान हैं. दहशत के चलते पीड़ित परिवार इसकी प्रशासन से शिकायत भी नहीं कर पा रहे हैं. गांव के सरपंच विष्णु नायक ने कहा कि मंदिर का मामला है. ग्राम का जनप्रतिनिधि होने के नाते जो सबके साथ हुआ उस पर ग्रामीणों से चर्चा की जाएगी.
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